ख़ामोशी
तेरी ये ख़ामोश आंखे और उनमें दर्द का सैलाब।
तुझ पर बीती बयां कर रही है,
क्या हुआ जो आज तू चुप है
तेरी इस चुप्पी से घर का आंगन तक चुप है
कुछ तो बता इस ख़ामोशी के पीछे वजह क्या है।।
कुछ खोने का ग़म है या किसी के बिछड़ने का दर्द है।
आंखों में झलकता पानी, तेरी ख़ामोशी बता रहा है
कुछ तो बोल कुछ तो बता तू सिमटी सी क्यों है,
ये नम आंखें, ये ख़ामोशी, और ये सिमटापन तुझसे तेरी हँसी ले गए
कुछ तो बता इस ख़ामोशी के पीछे वजह क्या है।।
रातभर तेरा दीवार से सटकर गुमसुम बैठना।
शायद किसी से बिछड़ने की याद दिला रहा है
पर तेरी ये ख़ामोशी अच्छी नहीं लगती
कब तक तेरी आंखें बहती रहेगा
और तू यूं ही ख़ामोश रहेगी
कुछ तो बता इस ख़ामोशी के पीछे वजह क्या है।।
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