Friday, April 8, 2011

सादगी


सादगी

मेरा तेरे पास यूं छुप के से आना।
तेरी जुल्फ़ों को तेरे चेहरे से हटाना,
इस बहाने तेरे चेहरे को छूना
और फिर अपने हाथों से मेरे हाथों को हटाना
मुझे आज भी याद है।।
तेरा छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाना।
लाख कोशिश करना मनाने की पर तेरा ना मानना
और उस रूठेपन में तेरी मोहब्बत का होना
मुझे आज भी याद है।।
अपनी परेशानियों को मुझसे छुपाना।
और पूछने पर भी हँस कर टाल देना
तेरी कुछ इस तरह की बातें
मुझे आज भी याद है।।
यही कुछ बातें रातभर मुझे सोने नहीं देती।
और तेरी याद, मुझे तुझसे अलग होने नहीं देती।।
तेरी यही सादगी तो मेरे साथ है
और इस सादगी में तेरा चेहरा
मुझे आज भी याद है।।

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